February 5, 2023
godavari nadi ka udgam sthal kahan per hai

गोदावरी नदी का उद्गम स्थल कहां है? | Godavari nadi ka udgam sthal

दोस्तों गोदावरी नदी दक्षिण भारत की एक प्रमुख नदी है और दूसरी प्रायद्वीप नदियों में से यह सबसे बड़ी नदी मानी जाती है लेकिन अक्सर लोग Godavari nadi ka udgam sthal के बारे में जानकारी प्राप्त नहीं कर पाते। यदि आप Godavari nadi ka udgam sthal के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, और जानना चाहते हैं कि godavari river information in hindi कहां है, तो आज के लेख में हमारे साथ अंत तक बने रहिएगा क्योंकि आज हम आपको बताएंगे कि godavari nadi ka udgam sthal kis rajya mein hai  कहां है।

गोदावरी नदी का उद्गम स्थल कहां है? | godavari nadi ka udgam sthal kahan per hai

गोदावरी नदी दक्षिण भारत की एक प्रमुख नदी के तौर पर जानी जाती है और इसे दक्षिण की गंगा के नाम से भी पहचाना जाता है। Godavari nadi ka udgam sthal पश्चिमी घाट के त्रयंबक पहाड़ी से हुआ है। यह महाराष्ट्र में नासिक जिले से निकलती है और इसकी लंबाई वर्तमान समय में 1465 किलोमीटर की है। यह बहुत बड़े पाट वाली नदी है। गोदावरी नदियों में प्राणहिता, इंद्रावती और मंजीरा प्रमुख नदियां हैं। यह नदी महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से बहते हुए राजामुंदरी शहर के समीप बंगाल की खाड़ी में जाकर गिरती है।

गोदावरी नदी का दूसरा नाम क्या है?

गंगाजल के स्पर्श से मरी हुई गाय पुनर्जीवित हो गई। इसी कारण इसका नाम गोदावरी पड़ा। गौतम से जुड़े होने के कारण इसे गौतमी के नाम से भी जाना जाता है। इस नदी में स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं, इसलिए इसे “वृद्ध गंगा” या “प्राचीन गंगा” भी कहा जाता है।

गोदावरी नदी की गहराई

godavari nadi kahan se nikalti hai
गोदावरी नदी के बारे में जानकारी | godavari nadi kahan se nikalti hai

गोदावरी नदी की गहराई काफी अधिक देखी गई है। कहीं पर भी गोदावरी नदी की अधिकतम गहराई 17 फीट यानी कि 5 मीटर से अधिक देखी जा सकती है, और अधिकतम 89 मीटर की गहराई देखी जा सकती है। गोदावरी नदी की सामान्य गहराई अर्थात औसत गहराई 28 फीट तक की देखी जा सकती है, और कई स्थानों पर इसकी चौड़ाई कई स्थानों पर गोदावरी नदी की चौड़ाई 50 मीटर से लेकर 100 मीटर या इससे भी अधिक देखी जा चुकी है।

गोदावरी नदी की मुख्य धाराएं

गोदावरी नदी की मुख्य धारा में 7 मुख्य शाखाएं मानी गई है जिसका नाम गौतमी, वशिष्ठा, कौशिकी, आत्रेयी, वृद्धगौतमी, तुल्या, और भारद्वाजी हैं।

गोदावरी नदी का धार्मिक महत्व

इस नदी को इसकी पवित्रता के कारण गंगा की बहन से कम नहीं माना जाता है और यह भारत की सबसे पवित्र 7 नदियों में से एक है। नासिक शहर न केवल इस दक्षिण वाहिनी गंगा के जन्म स्थान के रूप में धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, यह न केवल इसलिए महत्वपूर्ण है कि उसने अरब सागर में गिरने से इनकार कर दिया, बल्कि रामायण के साथ शहर के गहरे जुड़ाव के कारण भी। नासिक को दण्डकारण्य का एक हिस्सा माना जाता था जहाँ भगवान राम लगभग 14 वर्षों के वनवास में रहे थे।

नदी के किनारे तपोवन जैसे स्थान इस प्राचीन मिथक की झलक देते हैं जिसकी आज भी पूजा की जाती है। नासिक में गोदावरी के तट पर कलाराम मंदिर भी है, जहां 1930 में, बाबासाहेब अंबेडकर ने मंदिर में प्रवेश करके कालाराम मंदिर प्रवेश सत्याग्रह शुरू किया था, जो अब तक दलित वर्गों तक ही सीमित था। वस्तुत: गोदावरी अपने उद्गम में ही अनेक उल्लेखनीय घटनाओं की साक्षी रही है। इसके मध्य में नांदेड़ तक पहुँचता है, तख्त श्री हजूर साहिब उस नदी के किनारे स्थित है जहाँ गुरु गोबिंद सिंह ने अंतिम सांस ली थी। यह स्थान सिख धर्म के पांच पवित्र स्थानों में से एक है।

गोदावरी नदी भारत के कितने राज्यों से होकर गुजरती है?

गोदावरी प्रायद्वीपीय क्षेत्र की सबसे बड़ी नदी प्रणाली है। यह महाराष्ट्र के नासिक जिले से निकलती है और बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इसकी सहायक नदियाँ महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश राज्यों से होकर गुजरती हैं। यह 1465 किलोमीटर लंबी नदी है।

Also read:

यूपीएससी क्या है? पूरी जानकारी हिंदी में यूपीएससी क्या है? पूरी जानकारी हिंदी में
UPSC का फुल फॉर्म क्या होता है? UPSC का फुल फॉर्म क्या होता है?
12वीं के बाद UPSC की तैयारी कैसे करें? कर्क रेखा किन किन राज्यों से होकर गुजरती है?
UPSC की तैयारी में कितना खर्च आता है? एनसीसी का फुल फॉर्म क्या है?

निष्कर्ष

गोदावरी नदी वर्तमान समय में लुप्तप्राय फ्रिंजलिप का एक पूरा घर है। गोदावरी नदी में स्थित कोरंगा मैंग्रोव में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मैनग्रोव बन रहा है (godavari nadi in hindi)। यह विभिन्न प्रकार की मछलियों और क्रस्टेंशियस किड्स की एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसके नजदीक पपीकोंडा वन्यजीव, इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, इटारनगर वन्यजीव अभयारण्य, कावल वन्यजीव अभयारण्य, किन्नरसानी वन्यजीव अभयारण्य, मंजीरा वन्यजीव अभयारण्य, प्राणहिता वन्यजीव अभयारण्य, टाडोबा अंधारी बाघ परियोजना, बोर वन्यजीव अभयारण्य, तथा और भी कई राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य स्थापित किए गए हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *