February 5, 2023
afsar ke charitra ki visheshtaen likhiye

अफसर के साथ नाव में बैठने के बाद क्या करते हैं?

नमस्कार दोस्तो, आपने अपने जीवन के अंतर्गत अक्सर सुना होगा कि अफसर के साथ नाव में नहीं बैठना चाहिए, या फिर अवसर के साथ नाव में बैठने से संबंधित कई कहानियां अपने अपने जीवन के अंतर्गत सुनी होगी, यह श्री शरद जोशी जी का एक व्यंग्य प्रस्तुत है।  दोस्तों क्या आप जानते हैं कि अफसर के साथ नाव में बैठने के बाद क्या करते हैं,  यदि आपको इस विषय के बारे में कोई जानकारी नहीं है, तथा इसके बारे में जानना चाहते हैं, तो इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको इसके बारे में संपूर्ण जानकारी देने वाले हैं।

हम आपको इस पोस्ट के अंतर्गत हम आपको बताने वाले हैं कि अफसर व्यंग की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालिए, (afsar ke sath nav mein baithane ke kya khatre hain), इन के कितने प्रकार होते हैं, इसके अलावा हम आपको इस विषय से जुड़ी हर एक जानकारी इस पोस्ट में देने वाले हैं।

अफसर के साथ नाव में बैठने के बाद क्या करते हैं? (afsar ke sath nav mein baithane ke kya khatre hai)

जैसा की दोस्तो बहुत से लोगों के मन में यह सवाल होता है कि अफसर के साथ नाव में बैठने के बाद क्या करते हैं, और अनेक लोगों को इसके बारे में जानकारी नहीं होती है। यदि आपका भी इस सवाल के बारे में जानकारी नहीं है, तथा आप  जानना चाहते हैं, तो आपकी जानकारी के लिए मैं बता दूंगी यदि आप अफसर के साथ नाव पर बैठते हैं तो आपको अनेक प्रकार के नुकसान हो सकते हैं।

एक ऐसी कहावत भी है कि अफसर के साथ नाव में बैठने से अच्छा तो यह होता है, कि आप पानी में कुद जाए। इसके पीछे का मुख्य कारण यह है, कि जब भी कोई अफसर आपके साथ नाव के अंतर्गत बैठता है, तो वह आपसे अनेक प्रकार के सवाल पूछता है, यदि आपकी नाव के अंतर्गत कोई सुराग देखने को मिलता है, तो अब सर उसका एक स्पष्टीकरण मांगता है, या फिर उनके बारे में काफी सारी चीजें पूछता है और अलग-अलग प्रकार के सवाल पूछता है।

इसके अलावा जब भी नदी या समुद्र के अंतर्गत नाव को चलाया जाता है, तो नाव इधर उधर हिलती है, और यह एक आम बात होती है, लेकिन जब भी आपकी नाव इधर उधर ही लेगी या फिर लहरों के माध्यम से इधर-उधर होगी तो अफसर आपको जलती हुई आंखों से देखेगा। इसके अलावा भी अफसर आपसे अलग-अलग नाव के बारे में पूछेगा।

तो दोस्तों यह श्री शरद जोशी जी के द्वारा लिखा गया एक व्यंग्य प्रस्तुत है, जो उन्होंने अवसर पर लिखा है, और उन्होंने एक नाव का उदाहरण देते हुए इसे समझाने का प्रयास किया है, कि एक अफसर किस तरह से आपको अलग अलग तरीके के सवाल पूछता है, यानी कि इस लेख के माध्यम से उन्होंने अफसर की छवि को बताने का प्रयास किया है। और उनके द्वारा दिया गया और नाव का उदाहरण इस वाक्य को और इस लेख को काफी रोचक बना देता है।

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निष्कर्ष

तो इस पोस्ट के अंतर्गत हमने आपको बताया, कि अफसर व्यंग्य की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालिए, (afsar vyangya ki prasangikta par prakash daliye), इसके अलावा इस विषय से जुड़ी अन्य जानकारी अभी हमने आपके साथ शेयर की है। हमें उम्मीद है कि आपको यह जानकारी पसंद आई है, फिर तो आपको इस पोस्ट के माध्यम से कुछ नया जानने को मिला है।

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